यायावरी yayavaree

Wednesday, 24 January 2018

Indore: A Tale of Cleanest City of India

कहानी सबसे स्‍वच्‍छ शहर इंदौर की
अपने देश में जहां शहरों में गंदगी, कूड़े के ढ़ेर, सड़कों पर बहता नालियों का पानी और सीवरों का जाम होना आम बात हो वहीं इसी देश में एक ऐसा शहर भी है जो वर्ष 2017 में क्‍लीनेस्‍ट सिटी चुना गया और 2018 में भी सबसे स्‍वच्‍छ शहर का खिताब अपने नाम करने के लिए इस वक्‍़त पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है। स्‍वच्‍छता के लिए एक दीवानगी सी पूरे शहर में नज़र आती है मानो इस शहर के प्रशासन और इसके नागरिकों की जि़ंदगी का सबसे ज़रूरी काम शहर को स्‍वच्‍छ रखना है। आप चाहे चाट-खौमचे के अड्डे छप्‍पन चले जाएं या देर रात गुलज़ार होने वाले सर्राफ़ा की तंग गलियों पर नज़र डालें...मजाल है कि ज़रा भी गंदगी कहीं नज़र आ जाए।

राजवाड़ा के ठीक सामने स्‍वच्‍छता का संदेश
मैंने ख़ुद रात 11 बजे भी सफ़ाई कर्मचारियों को सड़कों को बुहारते और गाडियों को कचरा उठाते देखा है। शहर के हर इलाके में कचरे वाली गाडि़यों के आने का समय तय है। अगर गाड़ी तय वक्‍़त पर नहीं आती है तो ज्‍यादा से ज्‍यादा 15 मिनट इंतज़ार करने के बाद आपको सिर्फ एक नंबर पर मिस कॉल देनी है. इसके बाद नियंत्रण कक्ष खुद आपसे संपर्क करेगा और दूसरी गाड़ी मौक़े पर भेजी जाएगी। कचरा उठाना एक बात है मगर गीले, सूखे और घरेलू जैव कचरे का अलग-अगल वेस्‍ट मैनेजमेंट करना दूसरी। कचरे के प्रबंधन की भी बेहतरीन व्‍यवस्‍था सुनिश्चित की गई है। इस तरह निगम प्रशासन ने शहरवासियों को एक मुकम्‍मल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर मुहैया करवाया है और अब शहरवासी उसकी कद्र करते हुए इस पूरे अभियान को सिर-माथे उठा कर आगे चल रहे हैं। इस पूरी कवायद में बच्‍चों का जुड़ जाना इस अभियान की सार्थकता और इसकी जीवंतता का परियाचक है। लोगों का कहना है कि, ‘साहब अब तो बच्‍चे हमें टोकने लगे हैं कि पापा गन्‍दगी करना बुरी बात है और खुद ही हमारे गिराए हुए पॉलिथीन या लिफ़ाफ़े को उठा लेते हैं

बसें बस एक ही संंदेश दे रही हैं इन दिनों 

छप्‍पन का व्‍यस्‍ततम इलाका...मगर गंदगी नदारद है
शहर में सैकड़ों सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं। मैंने पिछले चार दिनों में किसी को दीवारों पर मूत्र विसर्जन करते नहीं देखा। पूरे शहर में जहां कहीं भी जगह मिली वहीं दीवारों, बाउंड्रियों, खंबों, दुकान के शटरों, बसों, ऑटो और यहां तक कि मंदिरों में भी हर जगह को स्‍वच्‍छता के संदेशों से रंग दिया गया है। शहर में हर सड़क के किनारे अलग-अलग तरह के कचरे के लिए डस्‍टबिन लगे हैं और कार चालकों को सस्‍ते कार डस्‍टबिन भी दिए जा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा विक्रय केन्‍द्र भी खोले गए हैं। आप लोकेटर की मदद से नज़दीकी शौचालय ढूंढ सकते हैं और तमाम सुविधाओं के लिए हेल्‍पलाइन नंबर 1969 पर संपर्क कर सकते हैं। मोबाइल एप भी खूब लोकप्रिय हो रहा है। 

प्‍लास्टिक कचरे की रीसाइक्लिंग के लिए मशीन 
रीसाइकल योग्‍य प्‍लास्टिक कचरे को रीसाइक्लिंग मशीनों में डालने पर गिफ्ट वाउचर्स मिलते हैं। हालांकि छप्‍पनके बाज़ार में लगी एक ऐसी मशीन मुझे बंद हालात में मिली। संभव है हाल-फिलहाल में खराब हुई हो। चीजों को दुरुस्‍त रखना अपने-आप में एक चुनौती है। किसी भी व्‍यवस्‍था को शुरू करना आसान है मगर उसे बनाए रखना बहुत कठिन होता है। फिर भी कमोबेश स्थिति बेहतर नज़र आती है। कुछ लोग इस कवायद का श्रेय निगम कमिश्‍नर मनीष सिंह को देते हैं तो कुछ लोग इस अभियान की सूत्रधान यहां की महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ को मानते हैं। एक महानगर जैसे शहर को लगातार साफ़ रखना यकीनन आसान काम नहीं है। चुनौतियां लगातार सामने आती हैं। इन चुनौतियों में एक चुनौती है धार्मिक जुलूसों आदि में होने वाली गंदगी से निपटना और आयोजकों को सफ़ाई के प्रति संजीदा बनाना। निगम इसके लिए कोई रियायत नहीं बरतता है। कुछ स्‍थानीय मित्रों ने बताया कि अभी हाल में निगम ने एक धार्मिक समुदाय के जुलूस से हुई गंदगी के लिए 50,000 का दंड लगाया तो वहीं दूसरे धार्मिक समुदाय द्वारा जलाशयों को गंदा करने पर मोटा जुर्माना ठोका है। शहर में किसी भी तरह की गंदगी फैलाने वालों को बख्‍शा नहीं जा रहा है। रेहड़ी खौमचे वालों को सख्‍़त हिदायत है। इस तरह इंदौर तमाम शहरों के लिए रोल मॉडल बन सकता है। 



स्‍वच्‍छता के लिए प्रेरित करने का सबसे रोचक अंदाज़ मुझे यहां के खजराना मंदिर में मिला जहां स्‍वयं भगवान की ओर से संदेश दीवारों पर चस्‍पा हैं कि मैं आपका घर गंदा नहीं करता हूं, आप मेरा घर गंदा न करें। बात सीधी सी है और यही बात शहर पर भी लागू होती है। हम अपना घर साफ रखना चाहते हैं तो शहर को क्‍यों गंदा करते हैं ? हम जब पूरे शहर को अपना घर मानेंगे तभी हम शहर को स्‍वच्‍छ रख पाएंगे। अन्‍यथा स्‍वच्‍छता अभियान केवल एक फोटो अपॉर्चुनिटी बन कर रह जाएगा। 
खजराना मंदिर परिसर


कैसे चुना जाता है सबसे स्‍वच्‍छ शहर ?
क्‍लीनेस्‍ट शहरों का चयन शहरी विकास मंत्रालयभारत सरकार और केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली नेशनल सिटी रेटिंग के आधार पर किया जाता है। स्‍वच्‍छ भारत अभियान सर्वेक्षण 2017 में कुल 500 शहरों को शामिल किया गया है और पूरे देश को पांच जोन में बांट कर हर शहर को कुल 19 मानकों पर परखा गया है। शहरी विकास मंत्रालय द्वारा Quality Council of India को यह सर्वेक्षण करने के लिए अधिकृत किया गया है। इसका सर्वेक्षण का उद्देश्‍य शहरों के बीच प्रतिस्‍पर्धा को बढ़ावा देना और उन्‍हें अपनी स्‍वच्‍छता का स्‍तर जानने का अवसर प्रदान करना है। हर शहर के प्रदर्शन को
·        म्‍युनिसिपल सोलिड वेस्‍ट – झाडू लगाना, कचरे का संग्रहण और ढुलाई
·        म्‍युनिसिपल सोलिड वेस्‍ट – प्रसंस्‍करण और ठोस कचरे का निस्‍तारण
·        खुले में शौच से मुक्‍त होना/ शौचालयों की व्‍यवस्‍था
·        क्षमता निर्माण और इलैक्‍ट्रॉनिक माध्‍यमों से ज्ञान का प्रसार
·        सार्वजनिक और सामु‍दायिक शौचालयों का प्रावधान
·        सूचनाशिक्षा और संचार तथा व्‍यवहारगत परिवर्तन आदि बिन्‍दुओं की कसौटी पर परखा जाता है।
इन्‍दौर रहेगा नंबर 1 
स्‍वच्‍छता सर्वेक्षण 2017 ने इंदौर को सबसे स्‍वच्‍छ शहर चुना है और ये भी आश्‍चर्य की बात है कि मध्‍यप्रदेश का ही एक दूसरा सुंदर शहर भोपाल इस सर्वेक्षण में दूसरे स्‍थान पर रहा है। अब इंदौर अपने खिताब को बचाने के लिए जी-जान से जुटा हुआ है। शहर में हर ओर बस एक ही नारा हैइंदौर फिर बनेगा नंबर 1। ये एक अच्‍छी शुरूआत है। यदि इसी तरह सभी शहर आपस में प्रतिस्‍पर्धा करने लगें तो पूरा देश स्‍वच्‍छ होने में देर नहीं लगेगी। ये कार्य केन्‍द्र के स्‍तर पर किया जा रहा है। इसी तरह राज्‍य सरकारों द्वारा भी अपने-अपने स्‍तर पर सबसे स्‍वच्‍छ शहरजिलातहसील और ग्राम पंचायतों को चुना जा सकता है। अगर इंदौर कर सकता है तो बाकी शहर क्‍यों नहीं? वर्ष 2017 के स्‍व्‍च्‍छता सर्वेक्षण में निचले पायदानों पर रहे भोपाल, मैसूरसूरतविशाखापट्टनम इस बार ऊपर आने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
वर्ष 2017 के शीर्ष 15 स्‍वच्‍छ शहरों में ये शहर शामिल हुए :

स्वच्छता सर्वेक्षण रैंक
शहर
राज्य / संघ शासित प्रदेश
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15




















ये इत्‍तेफाक ही है कि जिन दिनों मैं इंदौर में हूं उन्‍हीं दिनों स्‍वच्‍छता सर्वेक्षण 2018 चल रहा है। हो सकता है कि शहर इन दिनों पहले से ज्‍यादा सतर्क और मुस्‍तैद हो मगर यहां के स्‍थानीय लोगों से बातचीत करने से पता चलता है कि स्‍वच्‍छता अब यहां का वर्ष भर चलने वाला कार्यक्रम बन चुका है और अब धीरे-धीरे ये शहर की संस्‍कृति में घुल-मिल गया है। मेरे इंदौर में आने और शहर छोड़ने तक हर तरफ़ स्‍वच्‍छता अभियान की छाप नज़र आई. मैं इंदौर को 2018 में भी सबसे स्‍वच्‍छ शहर बनने की शुभकामनाएं देता हूं और पाठक मित्रों से आग्रह करूंगा कि मौका मिले तो एक बाद इंदौर जरूर जाएं और कुछ नहीं तो एक स्‍वच्‍छ शहर देखने के लिए ही सही. 

कुुछ और तस्‍वीरें इन्‍दौर से : 





खजराना मंदिर में अपील




छप्‍पन की रौनक 


सर्राफ़ा

देर रात भी सफ़ाई जारी है

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Thursday, 23 November 2017

India International Trade Fair: Reopening of a Magic Box

अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार मेला: जादू के पिटारे का फिर से खुलना। 

दिल्‍ली के प्रगति मैदान में वो जादू का पिटारा ट्रेड फेयर एक बार फिर खुल गया है। वही पिटारा जिसमें दुनिया जहान का बाज़ार खुद-ब-खुद सिमट कर चला आता है। हममें से बहुतों के बचपन की यादें इस मेले से जुड़ी हैं और हम आज भी हर साल ट्रेड फेयर के दौरे के साथ उन यादों से कुछ धूल साफ़ करने की कोशिश जरूर करते हैं। दिल्‍ली और आस-पास के इलाके के परिवारों के लिए तो ट्रेड फेयर की विजिट साल का अनिवार्य अनुष्‍ठान रहा है। चाहे कुछ न खरीदना हो फिर भी एक बार देखने जाना जरूरी है। बचपन में जब एक बार ऐसे ही मेले में किसी ने बताया कि ये दुकानें और साजो-सामान हर साल सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही यहां होते हैं तो मन यकीन नहीं कर पाया। ऐसा कैसे हो सकता है? इतना बड़ा बाजार, इतनी दुकानें, इतना सामान कैसे कहीं जा सकता है? मेला मेरे लिए चंद्रकांता के तिलिस्‍म जैसा हो गया था। फिर हम बड़े हो गए और रहस्‍य समझ आने लगा मगर मेले का तिलिस्‍म कुछ हद तक अभी भी बरक़रार है। 
14 से 27 नवंबर तक चलने वाले ट्रेड फेयर के पहले चार दिन कारोबारियों के लिए रखे गए थे और उसके बाद 18 तारीख से यह मेला आम जनता के लिए खुल गया है। मैं हर बार खूब भीड़ भडक्‍के के बीच मेला देखता रहा हूं मगर इस बार मुझे तीसरे दिन बिजनेस आवर्स में यह मेला देखने का अवसर मिला। सो तसल्‍ली से लोगों से बात करने का मौका भी मिला। इस बार मेले की थीम है- स्‍टार्ट अप इंडिया-स्‍टैंड अप इंडिया हर राज्‍य के पैवेलियन में नया प्रयोग करने वाले स्‍टार्ट अप को मौका दिया गया है। ये एक अच्‍छी शुरूआत है। 

हॉल नंबर 18

मगर इस बार मेले की शक्‍लोसूरत काफ़ी हद तक बदली नज़र आ रही है। दरअसल मेला क्षेत्र के बड़े हिस्‍से में निर्माण कार्य चल रहा है और राज्‍यों के पैवेलियनों को उनके स्‍थाई ठिकानों की जगह विशायकाय हैंगरों में जगह दी गई है। इसलिए हर बार की तरह राज्‍यों की भव्‍य सजावट देखने को नहीं मिल पा रही है। लेकिन इसके बावजूद मेले का तिलिस्‍म कम नहीं है। जिन्‍होंने एक बार भी ये मेला नहीं देखा हो उनसे मेरा कहना है कि वक्‍़त निकाल एक बार जरूर जाएं। अगली बार मेला अपने आप आपको बुला लेगा।
प्रगति मैदान मैट्रो स्‍टेशन के निकट गेट नंबर 10 से मेले में घुसने के बाद 12 नंबर हॉल के बाहर सीआरपीएफ का पैवेलियन मेरा ध्‍यान खींचता है। देश की सुरक्षा में सीआरपीएफ का योगदान ज्‍यादातर अनकहा और अनसुना ही रहा है। यहां सीआरपीएफ ने बड़े सलीके से अपने जवानों की बलिदान गाथा को प्रदर्शित किया है। इसी के साथ तमाम हथियारों और ऑपरेशनों की जानकारी आने वालों को मुहैया कराई जा रही है। मौके पर मौजूद जवान बड़े इत्‍मीनान से सवालों के जवाब दे रहे हैं। कुछ पल वहां गुजारने के बाद मैं हॉल नंबर 12 की ओर बढ़ चला। हॉल में घरेलू सामानों से जुड़े ब्रांड और कारोबारियों के स्‍टॉल मौजूद हैं। लगभग हर बड़ा ब्रांड यहां मौजूद है। जूतों, कॉस्‍मेटिक्‍स, चाय, इलैक्‍ट्रॉनिक्‍स और घरेलू उपयोग की चीजें यहां देखी और खरीदी जा सकती हैं। हाजमोला वालों ने सर्दी और खांसी से निजात के लिए एक खास तरह की चाय बाजार में उतारी है। 12 नंबर हॉल में पिछली तरफ है स्‍टॉल ....मुफ्त में टेस्‍ट कीजिएगा।
इस हाल का जायजा लेने के बाद मैंने हॉल नंबर 18 का रुख किया। यहां तमाम विदेशी कारोबारी ग्राउंड फ्लोर पर अपने नायाब और बेहद खूबसूरत साजो सामाने से लोगों को लुभा रहे हैं। वहीं ऊपर की ओर चूरण-चटनी, गजक, गुड़ और घी-तेल के तमाम देसी ब्रांड आपको ललचाने के लिए बैठे हैं। यहीं मुझे धामपुर का गुड़ मिल गया। एकाध बार पहले भी लिया है....एकदम शुद्ध और स्‍वाद से भरा। टेस्‍ट के लिए ही सही दो-चार पीस ले लीजिएगा। घूमते-घुमाते मधुसूदन घी का स्‍टाल दिख गया। दिल्‍ली के बाजारों में उपलब्‍ध तमाम घी के बीच यही एक घी मुझे अभी तक ठीक-ठाक लगा है। गाय का घी डिस्‍काउंट पर 450 रुपए किलो के भाव मिल रहा है। ट्राई कर सकते हैं। लेकिन हां,  घी लौटते वक्‍़त ही खरीदिएगा वरना पूरा मेला घी हाथ में उठाए-उठाए देखना पड़ेगा। और घी ही क्‍या साहब, आप 18 नंबर हॉल को ही आखिर के लिए रख छोडिए। पहले मेला घूमिए....तमाम और स्‍टॉल और विभिन्‍न राज्‍यों के हैंगर देखिए और आखिर में हॉल नंबर 12, 11, 10 और 18 को रखिए। आपकी असल खरीदारी यहीं होगी। इन तीन हॉल के लिए ही कम से कम 3 घंटा हाथ में रखिएगा।
मैं यहां से निकल कर हॉल नंबर 7 के बाहर खुले में सजी नेशनल जूट बोर्ड की दुकानों से होकर गुज़रा। ये वस्‍त्र मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला विभाग है। यहां आपको जूट से बने आकर्षक थैले, खिलौने और सजावटी सामान सस्‍ती दरों पर मिल सकता है। इन दुकानों के ठीक सामने ही हुनर हाट है जहां अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्रालय के सौजन्‍य से हुनरमंद कलाकारों अपनी दुकानें सजाए हुए हैं। यहां ज़रदोज़ी, लखनऊ की चिकनकारी, खुर्जा की ब्‍लू पॉटरी, चन्‍नपट्टना के लकड़ी के खिलौने, जयपुर की लाख की चूडि़यां, जम्‍मू कश्‍मीरे का पेपर मैशे और महिलाओं की आर्टिफीशियल ज्‍वैलरी के तमाम स्‍टॉल यहां मौजूद हैं। दिलचस्‍प बात ये है कि यहां मौजूद तमाम कलाकार राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अवार्ड पाने वाले कलाकार हैं। सो उनकी कला का मोल-भाव करते समय हम जरूरत से ज्‍यादा सख्‍त न हो जाएं। मैंने लोगों को यहां भी बहुत मच-मच करते देखा है। भाई आपको पसंद है तो लो नहीं तो छोड़ दो। हर चौथे स्‍टॉल पर हवा में फायर मत करो कि करोल बाग में 100 रुपए का मिलता है। ऐसे हवाई फायर पर दुकान से यही जवाब मिलेगा कि भाई जी, फिर करोल बाग से ही ले लीजिएगा
हॉल नंबर 9 में स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के पैवेलियन में एक अच्‍छा अनुभव हुआ। इस पैवेलियन में आपके ब्‍लड-प्रैशर, शुगर, बॉडी मास इंडेक्‍स और डेंटल केयर की अच्‍छी व्‍यवस्‍था की गई है। इसी तरह की व्‍यवस्‍था हॉल नंबर 14 में भी की गई है। एक छोटा सा फॉर्म भरिए और सारे टेस्‍ट 10 से 15 मिनट में निपट जाएंगे। यहीं मौजूद टीम में तमाम हॉस्‍पीटलों के डॉक्‍टर भी हैं जिनसे आप टेस्‍ट रिपोर्ट गड़बड़ आने पर परामर्श भी ले सकते हैं। सब कुछ नि:शुल्‍क है। मेरे बीपी की जांच कर रही लेडी हार्डिंग हॉस्‍पीटल की डॉक्‍टर से इस व्‍यवस्‍था के बारे में चर्चा की तो उन्‍होंने हंसते हुए बताया कि हम तो हर साल इसी तरह अपनी दुकान सजाते हैं, हमारे पास बेचने के लिए कुछ नहीं है मगर लोगों को उनके स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति खूब जागरूक कर रहे हैं डॉक्‍टर के मुताबिक तमाम लोगों को यहां पहली बार टेस्‍ट कराने के बाद आई रिपोर्ट को देखकर झटका लगता है। दरअसल बड़े पैमाने पर लोग अपने स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति लापरवाह हैं। जबकि ब्‍लड प्रेशर और शुगर जैसी छोटी दिखने वाली बीमारियों के प्रति बहुत सावधानी की जरूरत है। ऊपर वाले का शुक्र था कि मेरा बीपी और शुगर लेवल सामान्‍य आया। लेकिन डॉक्‍टर साहिबा के साथ चर्चा में कुछ और सावधानियों की हिदायत ताज़ा हो गई। नमक ज्‍यादा मत खाइए, एक्‍सरसाइज करते रहिए, नियमित जांच कराते रहिए, पानी खूब पिएं आदि आदि।

श्री अदिती नंदन
इसके बाद हैंगर 2 का जायजा लिया गया। यहां उत्‍तर प्रदेश, बिहार, छत्‍तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मेघालय समेत कुछ और राज्‍यों के पैवेलियन मौजूद हैं। मुझे बिहार राज्‍य के पैवेलियन में एक स्‍टार्ट अप आर्ट्ज इंडिया ने अपनी ओर खींचा। हैण्‍डीक्राफ्ट और हैण्‍डलूम को लेकर मेरे मन में हमेशा ख्‍याल रहा है कि इन क्षेत्रों में बहुत पोटेंशियल है अगर सलीके से काम किया जाए तो। आर्ट्ज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्‍टर श्री अदिती नंदन और उनकी टीम के कुछ अन्‍य सदस्‍यों से इत्‍मीनान से बातें हुईं उनके कंसेप्‍ट और अनुभवों पर। उनका स्‍टार्ट अप दरअसल दूर-दराज के इलाकों में बैठे कलाकारों से सीधे संपर्क कर उनके बनाए उत्‍पादों को ग्राहकों तक पहुंचा रहा है। खास बात ये है कि वे औरों से अलग यहां, ग्राहक की पसंद के मुताबिक अपने डिजाइनरों से डिजाइन तैयार करवा कर उस डिजाइन के अनुसार कारीगरों से सामान तैयार करवाते हैं। इस काम में जरूरत पड़ने पर वे कारीगरों को छोटी-मोटी ट्रेनिंग भी देते हैं और कारीगरों के सामानों का अच्‍छा दाम उन्‍हें मुहैया करवाते हैं। फिलहाल उनका स्‍टार्ट-अप पांच से छह राज्‍यों में काम कर रहा है और भविष्‍य के लिए उनके सपनों को मैं उनकी आंखों में चमकते हुए देख पा रहा था। उधर दिल्‍ली राज्‍य के पैवेलियन में दिल्‍ली पर्यटन के स्‍टॉल के साथ ही तिहाड़ जेल के कैदियों द्वारा बनाए गए सामान बिक्री के लिए सजाए गए हैं। तिहाड़ के इस पहलू पर हम एक अलग पोस्‍ट में बात करेंगे।
मेले में जगह जगह सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। कुछ देर और यूं ही घूमते टहलते टांगे दर्द से जवाब देने लगीं तो मेले को अलविदा कह बाहर का रुख किया। हालांकि अभी कई और हॉल और हैंगर बाकी थे मगर सब कुछ एक दिन में देख पाना कहां संभव है। मौका लगा तो एक बार फिर आया जाएगा। हां, यहां मैं आपको एक लाख रुपए की टिप देना चाहूंगा...ध्‍यान से नोट कर लीजिए। यदि मेला देख कर आप वापिस मैट्रो से लौटना चाहते हैं तो गलती से भी भूल कर गेट नंबर 1 से बाहर मत निकलिएगा। यही गलती मैंने की थी। इस बार मेले के अंदर का भूगोल बिगड़ा हुआ था सो बाहर निकलते वक्‍़त धोखा हो गया। गेट नंबर एक से बाहर निकलने पर लगभग 2 किलोमीटर घूम कर ही आप प्रगति मैदान मैट्रो स्‍टेशन पहुंच पाएंगे। इसलिए मैट्रो के लिए वापसी गेट नंबर 10 या 7 और 8 से करें।
14 से 27 नवंबर, 2017
समय: प्रात: 9.30 बजे से सांय 7.30 बजे

टिकट मूल्‍य: सोमवार से शुक्रवार 60 रुपए, शनिवार और रविवार: 120 रुपए (टिकटें आईटीपीओ की वेबसाइट से ऑनलाइन भी खरीदी जा सकती हैं) याद रहे कि मेले में प्रतिदिन केवल 60,000 लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है इसलिए समय से पहुंचें। हालांकि अब आप शाम 7.30 बजे तक भी प्रवेश कर सकते हैं।  
बाकी कहानी तस्‍वीरों की जुबानी यहां सुनिए....

सीआरपीएफ का पैवेलियन

सीआरपीएफ का पैवेलियन

इस्‍तांबुल का सजावटी सामान

इस्‍तांबुल का सजावटी सामान




चन्‍नपटना के लकड़ी के खिलौनेे



तिहाड़ की कारीगरी 

राजस्‍थान की चूडियां

खुर्जा की ब्‍लू पॉटरी







भदोही के कालीन








धामपुर का गुड





नेशनल जूट बोर्ड 



यहां तक सब्र से पढ़ने का बहुत शुक्रिया। अपनी प्रतिक्रिया से मैसेज बॉक्‍स में जरूर अवगत कराएं और हां, वक्‍़त हो तो मेला देखने जरूर जाएं 😊  



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